७९ ~पर न्वियञ च्व टन्य

(छल (र ष]

भिक)

मोगभेव्रिकांत्र षिडग्र छाने थकांभिंड क्ठेन। छाणारषि कद. (फथिवाव्र एकग टे थक ष्टानांत्‌ ङ्न भोकि गौद्व; खग क्वि मर्पय भोरेक्भे (मदे करी माखन कद्विष्वन गशहरकवब्र ग्र यदोद््रड अकागेक मोम शरूखक छेडम काशखं दल्‌ न्तत वि मिग शूखाःकव्र (मोष्टैव नन्णात्न कद्ििषटष्टन। यथम लोशव्र ठेठ] जोड "ढेन नैत्िखिभ मखल भन कंठिव। ७२८ श्वन्‌, "न १७७१ मान

जेयेकृकशजग्रो्ेमो | (माना-रोछेम्‌ | यदकृत

9 = 2: (म

५-४ .- ^ 4, क,

च्वि च्छा

[8 1" \,

अश भब्द

छत मङश्जाभत्र

छेः, रे कानेन निदृमा (लोक्षठि धय किकषिनि गक्ा्ण त्तौ उ\. दजिड नावि न।। मजा कगट्डत्र माङ्कदषत मक्र मख मसुकषे ठेनि शत्र कदिम्रोदष्टन ; अमन कि मद्िल भीत्‌ ऊशात कवार खानक अणि उ्टेष्ड मभूटणव्र उकम ञ्च कद्वद बराथिग्रोन

कङक्श्लि कथ। खांभाव कोष्ट व्रत मर रिषि (शन्न, --८मडे ब॒यिव कथ), (एो्-कृठदौट्ड आटकत कृण्‌।, थावाब्

मे नतिक।

यमात्‌ नैव घुम नाशम, लाफाटङत्र क्पफ़ंतौटक्त॒ पृत्‌ मभूणवदक्र घन धन वाण्रन (तथान), मृतवन्‌ (छाद्य लाभाद्रदड नो लोश्रारे् काशव डर) श्िनाठेम्‌ लश्य, ८म रुख नोदिट्कव मारवाखिकि शादाङ--टठे ममदृ्त॒ के} न्‌ किष्टूठे वुङ््डि शत्रिनामन्‌)।.

यन यामन्‌) छातटठ अठ्ःमानीःत्त॒ तुटकत्‌ द्शत॒ रिदा लिगि कि विनाल, खमौम, नौनांड खष्छ मभूणं ! धशिनोद्‌ ममरण मनरिव्‌ चगक्छ। 4ठे नडे ब्रऱाम'भटवुत खनत] मव्दाद्नेक्र] शल्क्त्‌। कंषएव्‌ ण्ड सन्त गष कन ; कऊट्लव्र टठेनेव ८क (यन खटश्रत्‌ शलश मःयाषेम्‌। ्सादष्ठ। थक्छठेना एषि एार्मि मथा पुतिय। 2८९, एड (षएाट्य सन ताटका दुत नामिव खाद्म; मद्रोव -°न्म्‌लम, अनम्‌, गिगिन्न कठ छे, कन्म यन्‌ (कान्‌ निक्रटकटमत्र कंन टेम ककम रकग ठेठ रिदनव॒ शत्र णिनि कष्ि्डःषट, 4 खभ खमौम मभुणं आतर ुनतराग ना (कोथाँग॒८ (कान छक्र न] (फयिलाम ना। मभु खनद (मोन्तकी (फयिग्र), मभु्णव्र विख >)8य। येय], टेमनिक्‌ (त्राऊ- नाप! लि्िम्र निनि काषिदड लान

मभूटव्र छेनेतव्र कड व्रक्म (तनै विद्णमत्र शायी (फरिलाम। मि-मिषे, नान्‌, वानूवाहव्रम्‌ व॑ड्डि नन नादौ मभूत्‌ छेगव्र ठेश्डश्िनि। कडकश्नि काष्ट नडः मभुजकटल्‌ ठशतर ददम मड छामिष्रष्िलि। अड़े मव गोयौ यकन

(*

म1‰ विक

ठुोलोत॒ राला मरन रष्वा एन: कि अभमौप्र कऋमड। छनवान ठेछामतर र्सिष्टन। ठेका्त्‌ भलःब्‌ खद किल खडि विदि, नाशो कर्कश उदक्त रध" भनिड न'०।

कड्कश्लि ख्ष्ुड उट माठ (णयिलाप्र, ढक {फत्‌

[नदमरन मष

मकटलव्‌ नम क्ानिन।। मानुर्मान, माक)टटन्‌, ठ'त' मर]

२। त्‌ गान्‌ र्ट

\ स्टवागान माष, नोन) शकान्‌ क्षन्‌, कतर्म, कंडाल

1

मशु द्‌द्‌)

मष्ट, ठाङ्टौ ङाक्रद गोष्ठ, माङाक्त भाट ठेराकद मर्व्द

मदद नक्र] नख) गक कंठामम, कयन) कथन शुव कुलि) ठे, विक गोष्ठ, एक माष, चेष.कूमाछ, शुकत्‌ म], कुटछ। मोष्ट--गिदठ मख वर्‌ कङ्‌, ठे7नक्‌- णिक रेल्‌ माष --गाध ठे नक्‌, जिभ्‌-माष --कं]7लाव्र ेनैव्‌

खष्ग माए ` माप1. मापे] ण]; अदछषि बात नड दरोद्क्‌व्र (नकन नडे; (भुनीामि मष्ट नाकठे। शग नशा; (वऽ मोट माथाश्चन। वृ वृषु,

म्‌]¶दक।

मोद्कवाहन शर्ख, भो जाकक्रत् मर ; वण नण भोगता मोष््-थाषठेट्ड अङि सख कंडकश्लि मोषे (फथिल्लम याक] त।ऽनोयौत मर मगुद्यत्‌ मटशा दामा निष दाम कट्वर

(नालम्‌ चकग २५ माठेल (वाश एनि्डङ्िनि। >५८१ छोगोत्रौ खोलिदय ४> पशि अक्रत), >५ जशिमोवर॒ क]

भोति

= = ~ ~

किलि ष्रौभै (तथिल्ड नाङेलनाम। यरे निष्लन पौव ङत्‌ धिम्‌] काकः एनि लोिन्न। किन्निः प्रौग निष्टान (कुल्य) ऊर ठेनात टेडव्‌-भज्छिम भर्विम्‌। छाव्नदमत्‌ न्द्िकि एलिदढ नागिन सदठरेथान उक्‌ ठीक ममः धौ शौ एलिःङ लान मोना मदक खनं ऊल्नत्‌ उननाग दिष्‌) एलिलन। धनोषिलम्‌ कमठे नाबि्ड नाभिल, किन्न खाद नाध) सायन | 4 {मे ट)व्रड मररामोर्नद --यशथादन ५,८.०० कुक अर्थः भाद मठे तमि (रूलिष् मगुण्टन शःश्ष) साय नादं!

>द्८मा कऊकृगादौ। मभूट्णत षएटङ्किट्क (कशा किष (यिद नीलम न।| मग्र पिन्द नादिनम्‌ कटनद ठेशद्‌ छा्िम्‌) एलिलन कणि क्रु ज्व यिष्टटनद्‌ छन्‌ (उलन द्र चे<क्िश् कठ्‌ कत्रि ऊग़ाऊ एनिः लःर्गिल्नि। नुत्‌ छृकरेट्डं (य (एिट्द्‌ (मष्ट वन्निदटव कृषः

ठकाग्‌ ग्गो एलिडगषट

ल्ल] < पट्‌ ममम वक्फद्त्‌ धकटे। छिमात्‌ नु्छिभुटय गष (ल्यिललाम; दवाय ठ्य जिदटनि ष्ठे नक्रा श्नि | दातत ्नि ञ्छ्न कृशानौ => फाथिपा अर्म दिवुनातृथः नति ठृठेलाम। क्िनव (यननार्‌ कत छथुक्रत्‌ ठ[त्‌ सप्राण माकर माकर एशल्निःड ननाशिन। जहेयाटन ध्{वत अडाष्ज्ग्रः केकर (यमनि एद्वर (मनि स्म)

म्‌ ्कं। १"

टत शिप धमत वरह, (ग़ वकद] मोक]; ठव मर्ववशक् जगाद नाग्नि क्रीड। यामव कत्‌ कऊनानाद्‌ गणम रमिभ्िलाभ; राट (फयिष नक धकप क" ४त्‌ शमन (कदत कव ठेनव न।ख्ोष्रेदा गण्ड लःभिन ८य नषट्कि ओागा्कद्‌ खग ठन ध्य रकष ङ्म्‌ (रनिन। (कयि (ल्य7ड ८नाषिनम्‌ शूव ८छ)वु एलिल्ड लानिन्न, ठा 0दत्रत्‌ पल शिष्टेन णेस वशिन्न | ०१८ छकरशरतौ | गार नृक्राशमानोदत्‌ क्र गैषिनि। शके वषु विश्च ोख्किनकं छिनिम वागत (षाय धाय शष नातिन कलत सः खाःनके गृद्ापठु छोमिग्‌ याष करात्‌ ठ्)कात्‌ गुट्द्तठ

शक्रानपौ एश मभू खामिभ्र) गख्विाष्ट। रातत फन .

मषानद्न्ते छक] छक्र कति! गक्घा। वर॒ ममम (फयिलोम्‌ खात एष मानद किष

मर्क;

पनिष््ि। घ्रा भूक नप्‌, ८्य चक्दाट् एङ्क्लिःक टव मत्र! बरे्लव भेत्‌ मरषेल एलिलोम ड्व्‌ 4 एश्-माशेत्‌ श्य न) |

कनध्मन्‌ दिष्ट ठ्ठ अोमाट्क ठेठ काट्१ छिष्छाम कंटिनि। अमि दल्लिलम, '"वथानकात्‌ नाम एक-माभव्र, किल डाट़े नटल बर्न कद्‌] धय < मडि मडि ए। दकम मण] मः) (नाक), एनत म्र मक्त लकम्‌ < केशि क्म्‌ छात्‌ तक छश.--मगुष्णत्‌ ठिक रेयान उन द्ग (ख्ट्म (टय! (महे कद्ग योनकोत्‌ छल «ड मा] याम्‌ एद्निण प्रोदरेल शकम मराल दान गोभिर यत्‌| यःटन चद्व दर्ग शशिनीव खाव्र (क्ःशा€ यमन भोतु)

पथ्‌ नौव न) |

षिडिस न॑वि्त

लक्घोत्र गूकाट्कड'

गदिन रेण््म ऊाष्रग्राव्री। एएश्रुत (ननाश (नाहिनिमं > छथ चेव जक्रावब्रगातव काठ खामिल। वकृज्नि भेटत याल क्न] (पयिष्ड नषेननोमर। खा मेल नष्टम ठे श़ाकाव्र शुचे धक विगोन नद्दड्दथनी। मुत्‌ एषे थे गारा एुराशतन्नि बडा बषटुड (पवशन गान (एरय दृविलांमर ठे} लह एठौने। काशन नियः जामिम विदलन. ५अदकमात्र, मामन. लक्ह। प्रौग, भूकर ज्र ठेर] ङ्वनविशा। गर्त) (कमन कात (डाल (शङ यानन |

के]:शृष्नव्र कंथ] निम्‌) अमि दिगि ठ्ढेलाम। छस्दामौत्‌ काष्ट कागेन ङि चरनत्रायु निदकतर शद श्ट्वन ?

काशेरफेन अमाव विश््राश्व कोवण वुद्धि्ड श!ह्ट्लिन, वलिलन, “जड विग श्न (कन, शक्मा? वमत] गूकातर (कड (पयव); यन बरकत (डाल्‌वात्र मभ्य नष, काट्तरत्र मक्र (एय) कवोव (कोनष्यनाष़े। लयन प्रानोतर एेशगोगटतव्र' गिक सोशाङं एना वाल यामि, मथो शष्ट किक त्राड श्व)"

काणेन वक्कन कर्मातोक सद्ग कि मत्‌

~ === ------~--- ~~ ~ काक = -- ~ न~

~ मौन[किकंः

0 7 रि ता 0 1

वल्लिटलन। उत्तर ऊर शरूनदोम ऊट्लत उनम व्‌ माट्न्नि। कानेन खामाटरकं ङिष्ठामो कट्द्नन, ^वाष्छ, साग्नि षृाष्टत॒ क्य (न ठंग नोट्वनन) डः

सागि विनाम, शना, किक 4 नरक कयन कृटव्रतु मटन भेख्िनिद) ककव मष लड कडि नि!"

--“खामोटण्ठ्‌ किंडर भुव खङा[म खाष् साढ़े (ङ्क क{व्न मकल खण्ग निश गःगोण्तु (ट्क्माड कृटव, कृतुण रुष्ट माछ नडे (सथनि मान शावा (परनि रि शुङ्छनकं ।*

श्रे दल्िश; सालकटकत्‌ कान फन विय नषेट्लन। ठःषट्द्द्‌ मामन भुहवनणुधि क्ःएकेग्‌। लट कति रषेटन

ग्निर्‌! अमाव मवद कषे न्शि देति; सफ़र कं यामिमू। टलिट्‌ सुदेकःन॒लाः8 नाक्ादफम चेनत ङान्नुकं

कष्ट कलग यष्ट डृढरेव. न्‌) खाख्िकत कण्ट मिः कान्‌ कव्िटड उट्ेद, वमन ति युन््वुदट्न वाच भर!तिध याटेटन ठ्न, उठा ठडेटल च्ड छ्य रषे न)। उाविमु] छवि कन (ल न्फ विन्ण्‌ च्म (कथ) ज््ि। सामि निरमा (य यान्कामान पौटशव काखीत्‌। उड अकष षत्‌, नटे षद्वरत माक भुटथाभु काके नण कात्र: किक कगकनद्रे करा] खिविग्‌] जराम)

नफ. £ कनूदमन्‌ सामल नेत कहत कष कान निदमाव निभ्रब्ानेद्‌ कथ! तल्िन्नम्र। कान नकृ]

मुर बिक'

¦ खागरव। गुकाकरटं (एचिषड याठेद न्ष ङाठ़ा4 शुवे

खानन्किछ रुषेल।

(म. वनिन, “गुकाटकट ण्यद्‌ याद्ष्ट्‌ खादनं भक मम्नकर किष (छदम साश्म्‌ छाल)"

खमि वन्निल्नाम, “ड (तम ठ; (डामत्‌] वम, कं कनः 1 €, दन्न |

कनटमन्‌ वलिल्ल,^साष्छ). शयथाय वनून गुतः एिरिकषः कि}

खोमिर्तालिन्नामि, “करविदर नदलन, भकः रुरष्छ मःश्रातत्‌ अछ्िन्करू ; उात्रडदामौद् वालन खाकम कटठ्‌ विक्र(कं निभित्‌ नाः छमा वरवेष्वं मुक्ता ठग: मादा वदन 4 ठृ यक्‌ खडि सनतत वरङ्ग, खः ५7, गतता, दुक्‌, के17०, न्क डद) खडि यष्डत्‌ मज्ड्िकेृ| वारष्त्‌ कलव; टदव्डानिक् दलन, ठेठ। फमुदकफे 8 कानुवनष़ अर्‌ नष्केम्‌ शके ठे छिनिधयत गिगिडढ भके; ङौरट्वुविष्ण्त्‌। दल्नन, केक <क्श्क्‌|त्‌ कगे्ठेत (कमिःरुड तल शर्थद ममष्टि भाद नौन्न, नोनाङ, (वदन, मा] नोन शकतृत्र भूकका इद्र थक मभूणडटन सशष्टात्‌ नाम वकशकात॒ दिककं ज], ठे दिक्रटकृव छिड्त्रकाद्‌ (नीपा शा करे भुक्ता ऊ्न्रिय्‌ शाकं दिक्कत डङ्ड्दि शथाःम कृष] (ष्टा गैं न"थाःतुतु कनात अड 4क्ऱ। जिनिस छग्राय, उोतटठे भाटय दिक्कत नी रटे क्‌ तक्म त॒म वृन्द ट्यु ऊेबृड भाटक ; रष्टटवत् नेत्‌ दष्ट्त्‌ अके त॒केम्रष्ग्‌ र्ग्‌ (गषकौोःन नुक] ठ्य काय ।”

५२ म] व्िक]

मि द) 9 न- [च ^ +) [^ = 1/1 [श + # 9) ज.

कन!{मन्‌ किष्छाम) किन, “आाष्छ), 4केषठे। सिङ्रःकत्‌ छि कि खनक बूक) ठ्य

खमि वलिलाम, “डान ठिक (नडे (कनद व] <कष) ठ्य, ख!द्ौत॒ (कानत गहा (कर्न बूक]€ ठम 1

कंनटमल्‌ वल्निन्न, “दिङ्रकं ८कंमन क्त भक तव्‌ क7त्‌

खुौत्नि वलिनः, डावर खानकं तृक्म्र देशाय खाए ८कष्े (कटे मगुण (थक दिक्रकङ्कन ड) काक कात षम) ग्य भूक छेदन नात्र कट्त। किक मषटद्ःषत मभरूणं (थक्‌ दिङ्रूक डले मभुखशाटततर दालिव्र देनव माष्त व) षएाोषटाटे4व ठेनेत डा) सका (एल्म) छ्य प्तुदमत्‌ बट ल्िकिकशछलि म्ब्व साग्र, छःवभेव (मष्टटना नड शद्रक | न्त (महेष्धाह्) वण (एोवाषछव खडिति सान (खतना ठर, मच्याटन छन), (वायः, मां कद्‌] जृ काठश्लि कृत्‌ ठ्स) दट्शव नतुम्र कल (मट़ेरलि कृष्ना उष्‌

क्नट्मन्‌ दल्निन, “चणच्छे।, (ष्ट मान अक्मादत्‌ भक्तात्‌ तनौ क्मपएमर्गदट

खमि ननिनाम, “धू मानि उक्रमाटव्‌ नद, षम छ्िमिदत€ (नमो क्ममामण्ड्; या्नाव्र (व भु यट च्व्चन (मठे भक्ताद्‌ (वभो। भक) (भोल ब्रश. वाफामिषम्‌, तावात्रर्वकषवरा8 ठय ।"

१९.

मजि वक;

म्‌टमन्‌ वल्लि, “बोष्छ) भूक ऊन्‌ड भिय कि खनक दिनद्फवर मदथा शड्‌ ङश? (न. वल्िन, “विनं खोवाद्‌ किं? सा सनकः छन्न -श्ह्ड छश, ठ] छटनद छड्व नाभ खरम कटुके ८मद्ण्तु दनिवाद टकर -एयियु। दामि टलनः, "न, धरम बूव वन, रो त्तधक्‌ (डाोगराद् ट्यु कट्‌ न] 2" वृक फूलाेम। (नय विल, “मात! छोदन $द्शुन एःलिद्‌ = ॐव नाबूनून, घरोत॒ बराह ट्र कवु सत्‌ खामि दनिनाम, “कि 4 (नोक देनव कर एदृर ठाद्श्रून्‌ छा नम ।" (न. वनिन्न, "य्न कि छन मटवाकरष्िशि उ!टउ्डे कि काडत्4 खडोाव शठ सथन किक खाक केट्द उयन छेके याग, (न) मद्‌ मामन एण्य ग्ध मठ सूदय. वुद्(नन र? मरिन खा (कान कथादार्बा र्ट नः.

ङो भत्प

ङ] दृट्त्रतर ज। -ॐसम 1

9

शवक्नि (ठत एव्व ममम कानः योनमामा

खमिग्र) गप्राकं चुम पठे

\

[९

भिर्‌! टलिन, डो. काश काया शदिः खनु (ननाम! कुलेन जोपरात्‌ ङक अग्र कट्‌ , वन्निटलम, भबरश्रनावर] मन्‌ श्ट!

स्मरि वलिलाथ, कानेन !"

काष्ठेन वल्ि८लन, “द्व खासन खामात्‌ मक्र |"

भःम वलिलामर, “मगूटमं नोगूवात छकरा त्रामफव (गावाकं गतु षव ना ?"

केश गृल्लिदनन, "न, दयन नय॒ मानान्‌ एतु भुय काष्ट वन छक क्तात्‌ किना [छषट्ड पिठ नि। यन वामता (नके ए८४ किनावाद्‌ केष या; (नोकग मव दत -द्शोवाके पिकं कवर बा८; परिक कऊगृभग्र जिग खामत्‌ा ड] शव मनगूणड्दन्न नाभू ।" (धग, क्नटमनं बामि कान्‌ ठेव माकर जोरोकत्‌ छामत॒ देनव जिगू। (नोकाग एरख्लिाम। ऊञ[ऊंव न) शेढे (नोकाषठ। वौश] शलि। नीौषएकन नोक प्री शतिर याभा

, मन्रुबिक। :

2.4 „> ~ ~ ~= 2 9 = = ०. ~ & ~

(मत्‌ ऊक खनक] कंव्िहष्िलि। उय्‌(ना (वम्‌ वुद्धि द्रण डाव देनैत॒ खाक (अध कब्रिश) अकृकत (यन चि फयाषढेःउष्लिः (कवन एङ अक्षे सत्रा सथान श्य"टन ८ठ्य। याषेट्डष्टिलि। नुव एकरात्र नटन टाकाषरेदष्द ष्ट कविनाम, किष किष (पयिट्ड नडेनामन्‌।।

(नालम्‌ वयन नषाण्योदनेत्र च्छ्म कुन; अनरिक्रदद मानात्‌ फौगु। ठेडात्रटे निकटे (मे उृवनविथाड भुकरक्रड “म्वा >ं5। कु बोषे्नत्र€ वनौ उक्त |

खामव्र एाद्विक्लन (नोक भिश् टेठिनाम। -मोके। छ] डिग्‌। (१ €म्‌] सेन : पच्िनिण््िकि (नोक एलिद्रड नाजिल। मगरूखकन खन्न खन्न ८कटे, किदे छाकाट्ज्ठे नोक] (वम्‌ :मन्‌ दोरे7डष्िनि। यामव मकटलद्रे एगेएाश; ककत मुय कान कश नाठे। कानेन यन कि खाविष्डाष्टन? साक्र याब (वनै परत्र नगर|

८खाव मोघ्ड शीौषएटोव्र ममम यावा] आटलःय रोवद्मि गडि अग्णेष्टेडाव्‌ (पया (नन ययन नए मठे; ातिणिष्क्ढे कुगाम्‌ा। ध्वल)] सोत ममग्र रशा देरिःटडे ममर कृशम्‌ (यन भञ्चवघ्न काटि (भल। वहेवोत्र ८नमं गणे (जयिट्ड नाोठकेनाम डोवष्गिट्ड म्रःद्व मोड तीष तश्गराटष्ट : जम (वनं नशेतिषाव्‌ (फव्‌] (भन (नोक कम्मे मनोत ष्रौद्शेत्र निकटे खयम्‌ दडेटड नात्रिल। कानेन मिहमा दमिपोिःलन, देर्‌ कोठम्‌ भानोदय9 किं

५७ मोशविकं)

4 4 ५६ ^ 9 [१ [नी ८७ + ८-७ “४ [1 ~ , 9 ५५८५ + ८७९ = + ~ ~+ ^ ~ + 0 ^ ^ ८/५ ~

मभू कि (यन (खिट नाशनम ऊत र्कूम भए (८नोकाग्र (नारव (खला श्श्न:; इति, डव मभू ख) (नाव्‌ (कलि न) (रूनिष्रड ्टेक्‌' कब्िष्रा मागिड (किन रवर मभूणङटरेट्न ङि र्म वथानकोत ऊनत शेडव्रड। खिन- शे भोव्। अवश्ा आाननाट्मव्‌ 9डोतब्रड। जएत्‌] (वनै |

कानेन निद्म। वलिद्रलन, “मत्रा कराटकराङव (टे शषक्ि। खात अक्‌ भमत मका जकेयटन चमरय ८ऊन-८नोकातव्र डोर (लटभ योद्व। ल्रेयोनकोत ऊालत महश नोनाव्रक्म विशम, वु वृतौत्र। खषटुड माङ्म वर कलव ङ्त (नम यणि। लठेवात्र सखामोदफ्द द्नीांसाकं नाव नाम्र। याक्‌ |”

मभुद्यत ठेनव्र (वश वर्‌ (एषे वशटिद्डश्नि। नाविक (पव माहा खामव्रा (गावाकदछलि गद्विलामर। मथाग कयन एकनिष्ठ शव्रिह्ड यहद्डकि सथन कानेन वनिद्नन, ^वयाटन खामाहणव्र खादना निम यावत्र (कान फव्रकावर्‌ (नष रूट्यीत्र बालाय मगरद्यवर छव मव (८फय्ड नाश्मना बोट्व्‌। खावाव्र खाल] निलय साश्म्राव्र विशं आनक्‌, लथाटन उग्रकत रवत खाप्ठ।, यन। (पय्‌ नटे षू बोम्‌व ।"

कान ष्ेःनव कथ निषु खामोत्र मूच ॐकाकेष्र (9ैन। (नउ कनमद्लव्र व्रा छान, छात्रा उक्तम माधाग कनि श्िस्‌। (कलि, कनै ेदनव्र अमन जनूक्र५ कथ) क्िषटूठे छनिटड नंग नाठे।

मारतव्रिक;

` खमि काशि ेनल्क सखात्रि सकष्ि शश्र किनःम :-- लिलाम, “मदकरं खातर नन्कुकं (नवन्‌)?

कनि ेन दनिट्नन, “वन्कृक निघ्य 4 रट्‌ ? कद्व उडत वन्पूटकतर ष्टम टे उेग्ननाट्ररतव (छाद्‌) ध्वनौ कटक नाभिर्‌ च्टे (छात्रे खाननात (कामवत्‌ कृल्नदश तशुन |

(न कृनूदमन€ षाव) मटर लदेगाष्िलि; रग

(१

न्य्व काष्ट यक्षि उग््ृव उालशरून : अमित ममम रुः रक गोना यटि (ठ्ाक्‌, यामन्ना ऊट्नन खट्व नोर्मिमु। नैखिनाम: नाविटकन्‌। मक्टलष्े (नोकश्‌ लडिन्न --(मयानकात ऊन टेम युषे भेडौत्रु;, गाद्रम॒तर लांब भैत्िक्ष^त्‌ भरि वालि। काानछेनव माक खोभरतर) ऊटनव्र डित्‌ कटमके नाभिम्‌] एलिनाम, (मड कागृनाषए। शृकेषनू। नशद न) बडेर खमट्वा मोष मदि साषे्ड नातिन; कि सनल्द [कृ]ुणन बुर, कि एकन ड)काटण्त शैडि, कि बशुक्व डर टट्‌ पि्क्ल दार्व! ओय बाद्ोठे कुषे लग्र कतुकम मने पवि नाठ्लांम। श्वाय माज्छेात ममम बदगष्टदवतषएटटव यामिग्र (नौक्टाछलःभ डेरा भू्काटकट्ठतर खोद्रष्ध। ८कषठि (काष्नि दिष्रूकं २'न टय एड्किध्क षष्च्य व्रस्ग्राहष्ट। (म प्य कंडे दमि नि दकिक्‌ वलिं नावि ना। (न. मक कलिय कष्ठे क)टनत॒ थलि नेम खांमिग्ाङिनि, कंडकश्लि खन्न

रे

भट मौर्भ[तिर

सन्त्‌ दिकरृकं शलिव ट्वा डृलिनल। किट बभव (मयोट्ने ताठेलोम कानेन नैश (कथोठेग॒) एलिट्नन, जामत] शिष्टान एनिलाम

श्यामक) त्‌ मभुखख्टनव कमि वठे अजग्न, यकं कं ऊम्‌ 4 टु (य ठडं डृनिदन कलत देनैव गवी 575, खांवा त॒ वक्‌ यभग थुवक़ नौ मोदके मादद निन्‌- गिद्स्व मठ नैो]टत्‌ (मठे मन्‌ शाटर)टएव (काटल (कृ{7न यक्तकात्‌ र।एटलत्‌ मरां कम्‌- मिय नामक्‌ वक शकत नृङ्ृएाक]तु तराक्रम रोमा (पयिः शोषेनोम; कडकश्लि निर खाकतर रक]कृष् छरक्रतर गदि श्रि घामाणत गोन उाकाषरेडश्लि-८यम उट्सात्र्‌ (राोन्ोद्धे 4क्‌ अक्यान) युक्त कषक

दमटमिम नाम्ने तकम्‌ हि मो

म्‌ ्ितृक। 2

-- ------~----- 9. ~ ~ ~

` 4ढे मव शरोर बूव्विशधो (भद्कोट्न बामह्‌। कए लवर मड खान छेनेशिडि र्टेनाम। एङक्रिप्क शाः; यथाव छेन नार्‌)ुथ्ट्ना कृकिमू। ययाभजिमू। नैषिमःष ; गोदत्र उलोग कललं शोटमव कृ] नध] दःनष्ि आश्र कृ उङ्कृोवु बोट्द मोद नथिहवुत वृ वृ धन रथाव छेगतकानब टत भत्रियु] खाृष्ठ। (मात्‌ टेनद्‌ रारन ऊातनो सन्नत एनिष्ठ एनिष्ड कानेन निदो ठे रके किं «कषठ छिनिव (पड नागिटनन। ^" जम्‌] (एय कृष शुका& दविकृके ; (ण्यिटड मन्नु (शान्‌ | 4 लाक वनिन श्म; एग < नाम म्फ य॒ गे; लम ७४० गोेछ व| मदर मा म। वृङ्क्त गृयव्‌] ष्ठष्ठ <क्ट़्े काकं छ्नि। काागठेन गाण्डि निकटे भिम्‌ सिक्कषे| वक्त उठेतांत शुक्तके छाद्‌ (ष्टादातु खा (महे भूद्रयत्‌ मटका एकोट्य एिट्नन। धक तके केव्िशा ध्विद्ज्छे ख्व योर ८पयिलोम--उणेवटन ड़] ठृलिव ना; सिक्रटकत्र (नोट मृषा कए वानु) मक) मान) वृशिसह्ठ, रिकं नाविकटनव॒ गड वु, -४{्‌] :यभूनि (नौल, ८मनि रेष्डन (मनि एू्‌खिमिग] चाभि नागल रटे) (ननाम! वाठ (मे =

पकए रलिम्‌ लकड (गलो ;, कद्ध कानेन योपरःकं वात्र कबिट्रलम ऊर (ष्टो) वावि कबविग्रा नङढ़ेद्नन। पष्ठ] खथनि वृकि (नेन सशबद्डत्‌ मशक भामोवु

२9 मशत्ििकं] = = ~ १५५१५१९, + 7४ ८४ = = ०५, १५४५ ५. ~

८९ ००५५ ५८५८५०५५ ५०५८ ~~

व्य जह्न छान ओट रउांशाषड वुदिलामर भूक्ताणिव एाग्र ८,००,००० शद्धे व्‌1 १८ नक्र एक) ृङेटव्‌ |

भिरि एलिवात्र शद कानेन निद्र ककर कि (खन (एथ) काठेय) नख्टिलिन। ठेमात्र कवग छख्नि जोमा्क कृ ख्ठेम्‌। एलिष्ड दलिट्लन। क्पे नाङ््व जाोोल गिर क्रछाठेणल छनि खाङ्रल र्सि। माभटन कि (फशाठेट्लन। (कथिलाम नटनवर कृषे पृषत क्ट नर। ष्टमा माष नाग्िद्ट्षट। पफ कतिर वृव्र कथ्‌] मटन शषनि। किङ्‌ कंग (न्यिलाम (य (महे ठइाघ्व नय

मठे क्फ) माङ्रव,-- थक जा माकर! करन उाट्ख्वरौगर वृतौ (एप्त मठ मृक्ता्यालःत ममत शह (मथन यामिय गरूका ङलिटठे योव कविराट्‌ (वषट गतमोट्‌ मङिव | पाविणाव उना मम विनैकं अनोक कंव्रिम्‌। (मथाटन भूक) उनि सामिषा लवर ठन ष्व (नोक) छामिद्रड्गष। (न्यिष्ड नाढरनाम्‌, (म अकवा नःमिदख्ठ सनाद चेशिण्ण; सदेकश कर्मागेड भकः दलि (नोक कके कणि पडि कृला्न तरिगा४ द्रे अविश (म क्कमानड टे] नमा केति माकर लकष शन्लि, (ठठ कठेमर दिक्कं कुष़ाकृव। थलि शृ्िखषष्, जावा टतः गट छ7लव्र माश जाथ मिनित माठ शखाकताटत्‌ चड़ कोख (मव्‌ कत्रि

शराएव बाणादनर्प्र।खषेय। यामदा उारोत्र जके कड

श्विक्‌।

(मयि्रष्टि। (म्न छ)टवनि ऊटनत्‌ र्नाम ठते मख गोव) ककशन परोक्ष )छोठेष) उ] शकं (पिः शाय खांशे (म जरे चे) नोभ) कद्विःड लान

+ - १५ "अ - 9 1 ९;

नबी ५५। इनिः!

परामब्ां€ (वमे खोनान््त्‌ मशि उ51त॥ काङं ८पयि?ट 21९ (पररि (मरे छाव (नाकि कलव खित नाभिम्‌ कं बुक्मयख्य॒ शकेम] (नल। नीचेश] (म डरा

२२ मो भैद्क]

क्नाटक भूक्तादृक्रल्डत उन्न] उठे ऊटलव्र छेनेटव्र देरिवाब (एष्ट कत्रिन।

डारोतर उद्यत कत्म वृकद्डि शोक्लाम। (फचिलाम ङ्‌ प्राधा देशत क्प्रि शका प्ल छोय ! सक्ष छर्त कृष्व (मष़े छकृडडाभा (नोकषिकं लश्रा कंसा डौटतत्र मड षटृषिग) मिष्डःछ (मरे (घले (षयं रिष (यन यादशन दएटृषिडष्ट; शका ठं) सटकदाट्व (याला, षत्‌ अहश्‌ माव रीड; श्हडाकं माव्िःड नड मणयः धन्‌{7न। ए)

छल्ग यामि का7 ठ्ठेगर कारकया वञ्नाम। उ) एटबर्‌ -कप्र च्डटट्‌ निङक्लकं दैषठेवाव्र ऊक (मठे (लकि

(1

सकनद एषे क्वि काएाठेन। उठ्‌ गिदव नानक, त्‌ भीम नागिन न। वा, किड्ु (नाकब्‌ खवा7ड (नाकं

(*।

(मदेन श्रेय नण्नि। उक्र) अवात एः र्मु (लःकडट्िकि शकनाटत एके कत्रिनात छक षटवा याल कट्यकं (मटक क्त गवादे 42 कृ टृडष। (भन।

कनि ेन निम जमाव (माका छठे काठम्‌ काद्र (षान (नन गक तवस्‌ भरिता सदकेनादतर राड मामद्न्‌ मिसा कए षद्लन। शक्े। नृडन (नाकं (किट नटा कषत वकात्‌ डुवुतरौटक छाछ कानेन निदान ठः कव्रिलि। काश ठेन अमम माणम र्त्र ञ्ठेष लाण्षठष कृाटवव्र बाक्रमरनव बनकर) कव्व लाजिद्लन। २1८4

मुं भविक २७

शष) पषिवा कान्‌ छनदकं एय कदिष्। काष्टिःर (तन्न

धोक] नादी नादी अमन मप्रम कानेन छे कति

५{६ब्‌ मद्विष्रं त्ाराठेम्‌। रात्र (ष्ठात्‌ ठक्रट्वह्‌ दुक्त शद्ग 7कद्‌]वर॒ आंगूल वमाश छिलन।

२७ म्‌ि;

~~~ ~~~ ~~~ --^~ -- --- - + -- -

८ए यि? णय एरेखःनत्‌ मश शवल बुष वार्धिम्‌ (भन कृःछत तुभ सङ्ुनास्‌ उयन (यन भैख्न कत्रि लोभिन्न। तुद्रक्त्‌ नामत काष्ठ कटे वक्व (कायात पएष्िःड लोजिन। मभुण-ऊन्न नान नलोल्न कटे) दरि नविक्तात॒ ऊन 4रक्रम मवठ़े (फथिटग नीादेटजणलिम, ५थन दकव फक्त ममख्टे वाना कटे दठेषिल। (कयि कानेन यन 4कङ्ा ठ़एटदत कफ) नानद्क। मात भत्िय्‌) उ) दतत्‌ मात्र कृलिटडषटन जनैत रोड (षाद ग्र कमानन्ट चेरत भ्म डौवने यै) मराव्ि्डाषटन। कि षिकं खान (षान) नमाढरेढ भाोवरिडछिःनन न) नल्निमर] इत्र खड जःचा7ड€ किष्टष्ड्डे पमरत्ल्िन।। कट्वर ८म कि सकं 4क्ट़। ताक] मथुण्छल मन यानाण्डि डे टेरिलन ८य, खांमव्‌। (माङ) टेश काछाषेःड शाविष्डछ्निोभ्र ना। उतर यन निंव शकः मौट्दट्‌ छात ण्वि कान एनद्क माण्निट्ड एशिमरा त्न्नि। कानेन सषा धण््लिन; दराध्त्‌ निगम ठ) कटिम्‌] कृन्‌ 7एेनदकं तिलिए-र्‌ (भन्न |

८८ न्[1& < कऋरमात >! दश्ुगन कर 5. छव्‌ काष्ट टुप्रिमा धष कम तुशुन कृतव दकव टेश नमोकरेर्‌।

[ [ „4

प्नि। जानन्‌ वुल काल्नाकं तकु नाश्व कड लान; मदे गफय ट्क्त (क्गद्ाश मगुण (यन त्क्व मभ कटय टेरिल। दोयम सकृताय ङाध्व मगठ (गाला कति

नी

व्नार्जिल। किरु खरान्‌ नकि (स द्टेष्‌] गा्मि-शष्लि

म्‌] ¶रव्क। २८९

71

नाख्व राड (म मव्रन-गात्‌ यच्ग्ष्ठ। गरद्धायब्रनय ठत जठ़ेवांव्र निषकाठेट्ड नागिन भिटैककेष्ड भिेकाठेट् क)ढत्फ़। कनटमाटनत काष्ट यामिमु वाकं। माति ठःषःटक ङ्द (रूनिग मिनि। कानेन निम) <न्रेवोत छेिम्‌) ताछाठेय। (मदे क्ड्डाना एवदीत काष्ट तिम उरक वौषटाकेवात (ष्ट कज्दनन। रष्व (कोमटृदत्र मडि काटि (काटलत टगत्र टूलिग्। शीत्‌ (भषानिव अक्‌ शाक्ताय ऊलव्र देशत नाकठ] द्डिदलन। चाम्रत्‌। छिन्न (मरेतवकाम ऊटलव देशव च्डरिष उवदरौत् नकाय निग्र छेमिनाभ। रष्टवव (लाछ्व दाशदोम्र एवदौव दिद्रशेस किष ठय नाडे। कानैरषेट्मव्र मज्ञा दवांस ८मन) खीसाय जोर्‌]त्‌ ण्ठान गोखष़े रिवम) अभिन्न। (एय शुलिष। (वादो अवात छम नशेलन। (म (पंरिन्न डाब मदोःतव्‌ ठेनेत्र डोम एक्‌निगव एते माथ) कृन्निदडष | कानेन यन ठाव गाःक ठकेषड 4कथु) भुक्त वाङ कति] मठे ़वुग्गेत्‌ क्टिनन। (म कंानिष्ड कानि्ड खक) चकन कंब्िन। खामाणव ८म निन ८कान ऊलःफ्वट] छोविष्ःछनिः म] उल जमन विनप्‌ श्टेषड (कं ऊाराटकं तक्र किट्‌ सात्रभेव्र केन एनत ककम मड बोबव्‌] कट्वर [ड्ड्‌ ला]रूाठेय नष्निमर। जौभक)त्‌ नथ व्च आश्टन्ट्रोत्‌ मदा याँमब्रो अगोटतत्‌ (नोल्द-वैष। (मोकाय खाभिगरा छेणिनाम। (नोकाौय तरी तठेनिषा यापरा (नाणिनटम

मा | तकु;

नी गी भक यः {9 [9 + ^ + * ^ 0, 0, 6 (0 प, क, कक

रित्रिटडशि, (णयि राखत उाभिभ्र। देए टेर) ट्त्व नैषि णु र्ठे्व। आङ वु कांत कं छात मरामांभत्‌ दाडोट बावत (के)थ€ (कथि नांश्मु) यग न। (फचिष्ड (फविटढ खामाटण्तु ८नोकोन एोविपिकं (नषे वात्‌ ठ)}खतु भिम) टेरिलन। छात्रा मक्टलठ़े भढ ङष्टातत नान एषि शिशा डागाटक भङ़े्ट खाव्र्धुकद्िन।

मकनन मःदए खातर जम्‌ मवा (न)प्रिलाम्‌ (नौष्टार- लाम (मम्निखामि कानेन निरमात्‌ मधा एङ छिमिर (ल्यित्लाम; शथुम कानि रेनद समममाङम, शिडौग्ः (य माकरसत्‌ खलश बट डन एलिश) यामिन (मद माङ्गावव टे टैत्‌ बमौमर एवम £ उालनाम्‌।

कथ शमः (मन्नि कानेन वाभःटक वनि्लन, “५ ठष्टठनामोदके (फृदलेन धण्त छाती कृष्टे, ल्व छविड्‌- दर्मत्‌ टेनद्‌ ि्न्मौत्‌) यानक्‌ ब्दात्‌ कट शुकम, यमि दयन <न" गदट्न्नि खमि नैट्‌ रदण्नि.-- निर्य

"तुब्द"जौ शन्न करानि कन 1”

५९।

र्थं शैव खोव्रव माशत्र ङ्दैटड (ना शिड नभत

ञ्श कङ्गौ (कविषु (कथि ` नङ्कष्ोनै ग्रक्मत्‌ (काटल कमः मिनार्‌] (नन। (नोद्निलम्‌ वयुन चाग कुणि बठल (वने पएनिङषछ। अनष्ठि नाकाछ्डि. जठरे क़ि प्रौनशूछत प्रा ८्य समर्था योन याष डरने मृषा र्षि काटा मरुर्णाःन एलिःड ल'जिन। खा ह्मिव कत्रि (मिलामि ऊशान-मभुणं र्ठ वांछं शवक नवदश ५५,००८ मराठेन नथ कानवत्‌ छन्ना मू] खार्गिगाछि।

शत॒र्नि ण्म काममातो। (नाषिलनम्‌ युथन छट्लवृ एशत्र खादोव॒ खामिना छरिल (्थिलाम एड़कि्कं {कशा क्रत एकि नोठे। ऊए़]कत्‌ भेष उथन देत नन्मिमि श्टिक, खरार <मान्‌ मानटतद शान वयन ऊोराकं एलिग्ष् | के €्मोन्‌ मानित शवम्‌ नावसर ठेनेमानदतवर अददा यायु सोम्‌ (मकेयानठे नेथ (गेव; छन काशन निम) सामरो्व्र (काशय लटभ) एनिष्डाष्टन

ढे विब्य खामातव (म (नास्व डोवन। (वनो: मियां खोभतर) (काशाग यषः ठ) छ्ष्ठाम किन

रेट मो‰तिक्‌]

- ~+ ---+ - ~ - ~- -- --- - -- - ------ --~---~ ~ + -- +~ ~^ --+---~- - ~-~~

यामि वलिलाम्र, “काशन (कोथा निद्र यष्छन दन्नृष्ड शरि न) (न. ।”

नट. वलन, “यो ८फथष्ि छाड वुद्धि ध्य कारनेन खामाक्तु भीट्ख देनमोग्रेटतत मलशा निम य)षछन); वकि ठार्न (मयान 'द्ड वावा सदिति वाम्‌ ठृट्व्‌ ।"

“स्थिति आमृष्ट र्म कि ठव? वाद्रवलमाद्रकन शधगेःतनौ बुद्‌ (न्ड मागत काक उयन्‌ एकदत ।"

--“{कंढु (लाश्डि मनत गुतस्मानातुव्‌ मड रज्र युहगरछ कनात कषे यन (मव स्म नि: ड़ एल ठेचेट्वादन खमा (कमन केवर कितव }"

“याष, (नए, ठेेद्नादण (स्तूरात्‌ छकरा नाद ^कन ? समि द्रन्‌ कङ्क (छाए काशा (साड छठे ना 1

ःत्िज्नि ट्यु; (नाणिलम्‌ धमान मद्वत्‌ एवि य्प्रःथगालि ठाव एतलना7ख्त्‌] कैद्विड नाजिन--क्थन€ छल्‌ देशत छामिगर। खावाव॒ कयन§ ततान्‌ कटल एटिग, कयन ग्र शौव अवत कयन धवनटवृत एलि्ड नाज्रिन। युन (कन निके गदेन द) द्विके कवि नवि ग) | शिक खर. कानमान्‌ ऊर दिएुट्षे धाव्‌ ब्ृढेलन|

ध्मान मानव षृटृट> खतृदत्‌ क्रे ननद (मवि नटलाम। मत्‌ ण्टेढ मक्त छात्रौ सन्न्दर (ण्याटे८रष्नि। एडक ट्का-मात मर केवला शदटएत ठेलत्‌ माणा मत्र] ताए शति

मौ दिक! २ॐ

वनभ (कथारेद्रुक्नि। वरु दष (शान (नोल मृजन्‌ ८तसिनाम। वाौत् ्ट।फएनि कि सन्तत |

८नाष्िनम्‌ सादाव छव मोतव्रिन। जाद्रद (न्दम काष्ामान कन श्रिम्‌ ऊारूङ एनिट्ड नागिन “के (क्कयान्रौ रविव म्रप्रदा सछन्‌ दछेनेमानेःव आवन कविनाम .--4़ः {यन क़] युःकिनि, रे कूर भिम्‌ उत्मरामागद्दद जल (लार्ड मानित टव कविर

(कक्ग्रातो जात्य खामन्रा यन मरत्र (एचि नाकेलाम। अढे मष्वषठि <क्प्रि यका (क्न्न] वनिन एट्न; काना भक्षत टेश दमि कं (सन मभुट्फ्व एविशाद्व नीष्रात्‌] किङ . 9८० शष्टाटक धटे रूद्‌ ठेरनाकट्त्‌ बरिकाद्व बोम €रिटकं किदोनुष्ठव्र॒ श्ट -4उन्‌ -षठेभिटक ठेरवाजःक्व षष्टि खटछग्र (कन्न)

सामि छखोिनाम काभेन यठेवातव निन्य किदिद्दन, का, मा कन्व (नाकालग कमरगठे निकंड़व्ेष रकेल्डक। किदि छोङ) न) कवि कानेन निम खम्‌ वाोद््वलमाछव अनानौत म्रा यद्वगे कृत्द्नेन। वा्वनमाट्छव कथा खाती, वको अर्थं "खर्छ यातु" | कङ्‌] टवा ववग प्राठेन खोत्र थट्‌ कृषि मकेन (नाए़िनम्‌ शरत म्म खा चन्त मदा ठेठ) गोत्र श्ठेश (न सयान ठेरव्राछ खत्रामौटमव खट्नक काशख िमाव्‌ एनाट्कवर) कात्‌, ८कानषठे। (वाक यढृ्डटङ्‌, (कोनष़] व्‌] (मनष्दार््‌ द्‌] (म) व्षठट्म

५० मश विक्‌]

~~~ ~~ ~ ~---+---- ~~~ --~--~-+~-~- - -

साठ काटठ कठुर (नादिनिमदके छाःनव उल डविश्] सषट्ड छृटन।

(मदेन एश्रूदतर वामत्र) (लार मोगेव निग नख्निामर। काश छःनव ८य कि देश ठा किष वुदधिनांप्र | जरात (ननं कपरगके कंत्रिस। ामिराषछ,-कंथान्‌)

~

छामिग्र। एनिद्ड्ढ खावात पद्व लारा (णथिटलष़े निष) एलि?उः ष्ठ

ण्ठे (रूकन्माव्रौ मका मस्व (विड श'केलोम। शूत्राटन जरद्‌, एाद्िग्िकं छक्र शौव £ (यमुत्गाषटत्‌ तानान। 4> मषरटवत्‌ मवा णषुषठे। वाढत एव्व परमकं 17

(लार्ड मारत षडेण्ट्िक्त कृश (तयि (मिदर एनिग) ठाकर यािकानत कन दि [लिड निन, कावम्‌, शठेन्टिकंत॒ कट्लत्र नलौब्रडा खनुक्र)कृड (वमौ | वानुमय॒ मात्‌ दशवर मिगनुवामोवा रे4 गह््वा लाक्रन किरा (ण्यिलःम। -नाशिडि मामव नाम वे, किदं कं]7एवु मड नब्रिक्घात्‌ छनन। छटलत धात्‌ एटे(उ्ठे “उव्‌ 5 चेष. केषा दग्रा; (काणा) शमो वालिन्न एव यु कि- , ट्ष; ८म अमौम मकटमिवर धयन्‌ मस नाढ़े। ऊड़ाछ | खाना शररकवकृल्ल थत्रि एनिट्ड लालन: रिकं मरकृट्मि, कद्ध नाषनालात्र मथा £ आनक्‌

कार समेन विग्र) यष नागिन टउगन कं{षएन

मोशत्िक।

क)नालाय व्मिश्। (न)श्डि मोनटवत्र खात्नोकिकं कम ¢ मन्नु (प़यिःड लोजिलोम। सयान खानक शन्‌"टलत (क्ट उष; विन्न याकोटव्रत रविर्न ऊाडौोय स्नुक्च (फयिल्लोज। देषपव नोन) शकत श्टनत॒ एकन 4 ण्ट कानत) चरत नोनान वकम गाव माब ए्खिः7ष--

शरदमतण्छाततननतः नार ककलन रन नकः मनश ~ = £ = ~ (पिः (वा ०. [रि 3 1 <: » . ५१८ = „~ 3 = 4 =

नर्न [शड्‌

$न.छि च्छ, (दया स्लछठ, निवरो. सल, = (नग्राल) "र छत्ििटनत मि मिरश्व शौव], मशरुट्वव (नल छेडापि। ठ) वाधौ (19 नान। शको कष्छने (पयिनाम ; नांल, गयेन काटल), उल्‌, (मानानि (ष्टे जटनकं मष्ट (तविलाम्‌

५२ मोभैनिकि!

--~ -~- ~ ----~-~~ =^ ----- ~ - ~ -~~-~--~-----~-~-----~ ~~~ --~------- ~~~ ~ -- --~-- - > ~ # ~ -- +~ ~~ ~~ ~~ = ~ ^

रे (कमाती एशरूत्‌ (वनाम ऊाङकत एम छश) ` (यि कााश्ेन निद्या ङ्च] खाष्न। ऊ।विनाम (काशाम्‌ याद्वन ङा डेवाव॒ छ्षण्ठाम। क्त्र यक्‌, डे रिक्‌ स्‌ःयाभै।

कगेन चामाकं (फकिल्ड नौषेशः काट खमि खाोमाद्कं वके) मनात एमि छण्डाम] कंति्लन, “नशि मानव खानैनोव (कमन नानि शद्क्मात? ववर खनु

(9,

यग्रयी (ड कि अनन्‌ छाल लागि म? 4 शवन्ल, माष, ग्ण. 1 - ष्ट, धूह छाल लार, कानेन मभूरखनोडवु छरछ््त्‌ टिक कऊोनट्ड्‌ €.८०य (नोषठिनटमत (एस्‌ चमन स{द्वि। खात्‌ किंटम ठटत }* “शयु टःठे नम॒ शल्क्मोत। यदे ८य (न।र्िड मातर फ़ उयृ्रत्‌ मभु; एटशिदिके अमौम मक्रडमि वय्‌ क्नु; ठका मेटल मदथा राष्त्रं नोमरशक् (नरे। यन दालिद्र ८; ठे कृ छृष्ड वराङ्िनि वाजि थम

८77९० 4 4

मूल शष्ट खातर कटलव छ्डिति कड नृडन नुन (त्रा तालिन्‌ एत॒ (9 ठे? अत्रे कदन नागर तरायन कदलि नाकं बच्छि। सयान कट कालात्‌ राखाव्र लाङ]ङ नष्टे ठग यात्र, (कथा किष (नषे 571९ वमन 54 कृ नानिव तानि रेष्ठ छेषष्ठ नयाम ऊनलव्र ठेगत्र थलय डाश्‌ सक्र कात (टत (य क]कखं (मके दयात्‌ माकर ष्ट

मोत तिक। ८.

{तावा लित्‌ गवा सटकवांदतव अश ठय याम (नाषनम्‌ 1मजि मव (षटाबावानलिःक्‌ योट्कन्‌ कंटत॒ न] ।*

-- छ), कानेन, (वोर < जनौमव शोषौनकःटनव खिकि7मऽ 4 मव्‌ डयम दट्ख्व छेद्यं खट्ट साष्छ), पकर क्थ्‌। किष्ठाम कवि, कंन शद्विष्त्‌ ग्वं “स्‌ म्र (नोश्डि मानव डन (कन

--"टनटकं वदन बूम यथन ऊ]ङात्‌ (लाकंकन निद 4५ नखं शात ठुष्छिद्रनन स्थन मभूखं कक्‌ छट छत्रिक नथ ट्त (णय; नशिषटट्न कात्‌] ताल] ऊक्वर ट्मकमामे नदम्‌ ट्फ्तु तुष्टं समष्ट्निनि। रथन सदत्‌ ताल] मगुण वोन छयन मूनात (नांकङन नाद्व जिद्रम्‌ €; मभुख< यमन (ख्मनि रट याश्र। (मकमा मव टद्‌ व्‌, (मठे सत॒ नाम (नाशि मानित व॑ द्व 1 | | “लार्ड गभिब्रं गरषा मानवत्‌ टधा बोङिकःतु

कानि ऊग््ैकु मिग्रात्‌ मक्र मरुत खा (महे) 1 क्ट्न ठेषटेद्तान २" व्रडवट्स (यट ल।का्छंत्‌ कड न्न मग्र नानैेड। टेल शरटव्व खर्‌] कें किक] घृत 1वृर्वध्व बाम्‌(ॐ सड खनक मनय नाशि 7एेलाफिक मङ्ामोताःव खानक विनुट्पत्‌ बटरबा न्ड ठ'ड:

गग्थेडि बामोफत (फटमत॒ ककन मरङाद्] नरक श्छ मागत समवा मानव चके दोक (याभ कद्व

७,

८३ म्‌] 9 बिक]

> ~~~ ---------~ ~~~ ~----- ~--~- --~----~ ~~ ~ --- ~~~ -- --~-~~ -< ~~. ~ -<- -- ----~ ~^,

छारोल एलोषएटनव्र॒ खनक स्‌विशु कट्त पिषष्छन। छ्‌ नोर (नदमश्न. छात्र कोक दन (शैव्य नि।”

-- ^), वांख्टि्कि छनि क्छन मर्द) वाक; किच सट्क कनाल मरा रिम यागनाोक निद (बु गातृद ना। कोल वक्वा जोशनाट्कं (नोर म. समौ कऊाराटकत (टि (्सिदम द्मा मानव जिष शुष

--“कानूक्‌ ङ्व मादव जिद्‌ नेर द्रवन !"

-“छाड वड आन्वी ङ्न ८कन श्चटक्माद्‌ १"

“याभि साग्र] रृष्छि खषु यके (उद्व कानटक खार ङ्ग्व मोग (कमन कटु शिघ्य शेष््तम्‌

ष्टे] योव ड, उड योग्छशीा ठृता]द्‌ हि साष्ट?

--“खामि दू लवि शनि (कमन कट, अकण््निः प्रहा बाकिकाव॒ ेडमान)-खष्त्रोग चृत याषेलोकिक मद, मानव शाव ट्म डमा मातद्व साोदवन

--“खांङिक। चुट याव ड] याननाटकं (कं वन्न!

-- डत (कमन कट्वर बावन! मै गसू ठेख मामः छाक्राद छेशदब्र शिद्ि खोशनि ऊर्क षएोनाद्नन न) कि

--ष्ठेनव्र रिग नगु; सयक ठेंश्‌. मदमे मोषटित्र पिम याव्‌ ।"

-भ्माष्निव उन किमू! (मकि वरकम

मोँशत्िक। ७4

-. ~~ ~~ ~~ ^ ~~~ ^~ ~~ ~ -~-~ +~ ~~~ =-= ~ 0

-- + --*~ ~~~ ~ ^

-- ^ लोग्नाठात छेनव्र॒ खानक (लोक यन याल काष्ट; कि जोव गै मङ्ख वर्मब शू८क्वं छनैवोन «छे समख ठे मटमनत्र वक्‌ निघ्न रियर वकर) सतक्रं (वफ रिद्गटकन, माङ्रूव (म मष्क किष्टूटे खनन)"

--^4 वकम सवक्रं मणि मणि खाोष्ष्ट्‌

ट), खाट, छावर अशा म्य (नारि मांनेटतद्‌ ऊन मक्षा मनिप्व जिम नै) यत॒ नो बखाद्त्दिश्रान्‌ नन्‌ ।* |

--“जाःव रे सूव्राक्रत आटा निनय (षएोतावालि खा; डावर ब्रश (नीटन विशि श्ट्ड नीट्रत॒ }”

---“(बाषषे नशर, (मे गोथाःवत॒ सदक्र, क] मोष्नितु छेनतर॒ र््ड (म सवृक्र खटनकं नौ, जनाय दोल्ि गाङ

--“खाष्छ] खाननि ये सत॒ध्क्रत्‌ कंथ (कमन कटतु छान्‌ड नौतुटलन ?

--^कङकशलि किनि विणम्‌ नन्का कट्त्‌ वे जामि खोविक्कतव्र केतूड (नेदब्ि। खोभि (टवषि स्मदा माभीटतव < (नोर्ि मानन मोष्टरलि मव धकं कारो, छार्‌टमतु खांकांत॒ शेषन नर्न मबङके अकं छोल्ड खानि दुङ्धनूम ८य्‌ खट्नत॒ छिव सूतुक्रं न] शकुन अमन क्थटन] "ट्छ नैत ना। छोब्रशब्र खामि यात्र वक्षे नोक] कनूनूम;, इङगरदा मोनट्वृतर जनक गोष्ट शट छो्णव्र (नटं जामत खरे)

८४ मुत्र कि)

90

५न ९५ ९८०५.५

0 6 ^

नैद्विश (गा (मए4्‌ कष्ट छव सान (छ पि। कारक माम शट्‌ किनि मिद्वशव्र छेभैकृन 4ढे वकम खनक खोर भेव मोट याभाव लोन शैु। उशन यमि वृदनुम्र निग ड्द सक्क्र योष्ट। छोद्भेव्र माम कटु मने सूदुक्रत खिख्व्‌ पिम खोभात्‌ कारक एल); «कुनै दकवाव्र एालियषठि। “ढ़ सूतृक्र यणि शौकृड ड] एण थे (नारि मर एकृष्ड जामि मारम्‌ कवडमन।।"

नश न्ष

एभे-खङकम्र ङलखखु

नैव्रकिनि णके (ककरातौ। दएरशरूव (वलग जाकङाङ शूनताम्‌ कटनत ठेशत छामिमू] रेमिनि। खाजि ोद्फत टेनैतर भिषा रेठिनाम, माकर मक्र (न ५व्‌्‌ कन्‌ट्मन्‌< एलिल टो्नत ठेनैत॒ वमि छिनिखःन खटनकं विषम कंशवार्ड] कश्िक्ि, मन ममश्र (नण राड वाठ वलन मग्रूदणत्‌ वुक्‌ नैव कि कङ़े। किनिव (फथौरेन।

(नख. खामाटक दछेःष्तभे कतिश] करिन्‌, “यथान कठ) किं ङिनिव एनच (फथट्ड गष्छन ? €के.--जैयाटन ।*

खाभि वजिनाम-“कंटठे (कोथा? यौमि किष्टूठे (एश नोष्छि न) |“

(नख. पृट्व खांक्रल (कयात्‌) कंञिनि, “जै ध्य चीन; शूव छान कट्त॒ (कशुन, नट (व्क ।''

रेव) त्र जिनिरऱ) (मचिद्ड गाठेनांम। यम्‌ षे माठेन पूव यक्षे] का कांटन) शकार्थं मभूखवटक्र छ] मिट्छःषर-- एक्‌ (वन यके वलिब्रषएवर। (मे| अक! क]७ जः --4 ककत खङशिकम्‌ ऊनङ विट्भैष

एशशोल्क (परिमर) (नाव (एठा सनिम्‌ टेन;

1 मोभसिकं)

~~~ ~~~ - ~~~ ~~~ ~~~ -~-~---~~--~----~ ~~~ ~~~ ------ ---- --+~ ------- - -----~-- ~~ ~~ ---+--- -- -~~-~---~- "~ +~ +--~~- ~ -

रोश]टक गमाविवाव॒ खं (नघ्छ्व रोड निगेभिगे कव्व. ना्िन-र)ट्ड छात्र (मठे छय्चानकं रोतव्श्रून। मटन र्ठरेन थयनषे वृदि ८म ऊट्लव छेनेत दशहि नैखिद्न। जे जमय कौश ्ेन निम) ोकवर देनैव्‌ खोमिटनन। खर हाटक (फिगर) (न्त (एोयभ्ूत्यतर छाव (क्सिमू) कानेन वलिट्लन, “कि (न, फुशशोट्क (कटय यन एने कट्वर त्रद्यष्ट (य? ज्वर ऊंलज्डषठटक (ण्डय छम (भ्न नोकि

(न. वनिल, “याशो क्क (नटनष़े वटकं मावा कट्व॒ जमि।

काश्‌ ेन वनिदलन, “ङ्‌ (यट नोव, खांमोव (कान्‌ खाशैडि नाड; किष (कट) रोट्टत लका (यनन ख्म्‌कग॒।"

खमि किष्ठम। कत्रिलांभ, ^८कन, भै किं वरु श्श्स छ? भिंकांव॒ कष्ठ शिग्र (कौन विश्रमं श्ुष्ड ट्‌ ?

कानेन वनिटलन, शठे, <वा शशक भिंक)नौटणत्‌ छेन लांखिःम यम नल, खात उाण््ड (नोक छट यांग॒। किदं (न. खथन सोषु डथन ध्म तक्म (कान विनिपं रङष्ट्व नो वलन प्रन ्म। छाव रृ}्डत्‌ डाव चनव खामाव्र शव विश्राम बांट

4 ममग मोम नाविकं षाण छेभैत जखोमिमू ८नोक) शुनि] ऊःनत रेने ऊामाठिन। अकज्ञटनत ठ]ट्ड

मरति

पकट़। डिभि माति्वात्र उाव्रश्रून; गरन नोविक (नोक) क्खु विमा वमिन। (न, कनृट्मन्‌ खोमि (नोकाम् जिम) मिलोम

काश्‌ नकं कष्टम कवलम, “यांशेनि खोम्‌टवन []

कनि ेन वल्िटलन, शनौ, बोभि बाव्र योष्व न।। भकात निट कि योनैनाएव (यन कटति खाम्‌ (णय {ठे | (न, (कटय) का (यन कम्‌कांग॒न।।

८म्योक] रोखिमि (थ्य कटेल। एयलन वलनिषटे न)दिटकव्‌ {ष छोनोव णक (नका (न)ङ्ि.माभटवत्‌ देशव पिम गोवत्‌ प्रर षटषि्रड ल)गिन। शद रिक एके माडेन पुटद। मयि (विड (नोक) अव काट खोमिग| नंडिनि; मृटवके एुनैरे। जटनलत गत छोमिट्डाष् <ङेवात्र (नोकोत्‌ 1 शूव बाड बाड ङ्डेष्ट नोभिन; बाड कानक्रशं गेट रुगे न) शोनाँम्। र्ड उ।वुश्रून लेषु) (नोकाोत्र मारन रिष कीटेन; उोहात्र (एय ठषे। द्रल्लिड नाभिन, खोल वरु मोर्वोख्किं ऊंनङङ्व्‌ नषि र्क्व कात्शरूटनत्र मक्र मकताएटव्र ५क्षे] वी वादकं, कातरम्‌ राव्रश्रूनदर याला शकष) डिभि यन छल द्‌ बात, छेनैःततर॒ (मठे एषि शति सोडात॒ डि निर्नग्र कब्रार्ग्; किद् ठे रोबशरट्नव्र मर्ष वु शा श्नि, सोरे कुतर (्वन्मौ र्क्व न।

82 मोभत्रिकं]

दशर कि कटव नका क्रिस (पथिट्र लाभिलाम। मदाद्‌ (मे कनत छेन छ) भिट्डशिनि, (वो कय (वर (शोडृटेद्ड ामिम्‌। युगषद्‌। शस्थिनि। ठान, छिगि शि ऊंनङड शाम पमौ्च-ख)कृडि रेष शाकं; कि भर लक राडातरत ममान ङटेट्ल शुनठे (वमौ ऊंनणृौ भिक्रूट्वष्ठिटकत्र मड ठेराटमत शतरौत थुवके (कट) < (माठ, जाकर सक्ष (लङ खोट; भट्रशत्र ठं) खरि थका, रत्र ङ्छ्वकांव शः (यन थक क़ शेकक्तड

नोक] यथन रिक शटनव्र क़ रोड खाोष्ठ, ठथन (मछ ना७ अष गक्िवट्न शाव्रश्रून षटंङ्नि। उ) ब्श्रूः शःत शाय लाभिमग याःकवाद्द्‌ 91 (चंमिगन। कट शिशा नणिनि। (नख ब्रामण श्य छात्र एन छि तना गिन |

खामि वन्निनाम, (नटन, (न, (नशे; मै ८फः तक; किदं त्र शोय राव्रश्रुन लोतेनि; व्व कवि (ल व} 9। ८चंटमषएटन (तरह ।“ (मछ. (@षाटेग्रा वनिल, “नोभे रोत्‌ एना<, रादशरूटनत्र मरि धन्‌ कटव्‌ |”

ङाङारोङि (नोक एामाटेगरो रोत्रशृटनन्र मणि द्र ठ्ठेल एः कटनतर जनाय विग्र (ए ष्पद; (नोकाः सथागक्कि (वाश एलिट्डाषट) मोल्द भाद्द छत्र पेम लङ! ऊटलत छेनैवर॒ ऊांमिम्। ठेरिः्ड नाजिनल। (फयिनलनोम जधा

मत्कं] 8:

"माष्ठटे नाद नहडे। शैः छांभिम्ां छेषिटनके (नय. यमन टारङाटकं यादाव शकार कुोटनव्र प्रात जावा कद्व साग (मरे भृष्र्ढढे (मे छ्विष्र याट नागिन; (मण्ट्क्‌ सकफे स्याने रिष्शिनि न)। ्टमूकन्‌ नाविक शानन्‌ (वान प्री द्रानि्ड नागिन; रोशाण्त का्ट्त्‌ भिवाश्ट्न) एए कति) कुलिश) देरिःड लाजिन। नोक) छुभःम्‌ शिष्ट्टन शिष्न छटवत अड षण्ड; किङ मव दकि वृर्थागरयांय॒। भैक किष शव्रिःड नावा (भेन न} गंनव साम तकमर भलोनौन शांकि गौटत्‌ (नय डाक] जगरङरे यटमोभ कति ल) शिन

कते! शतिम्‌। ढे यु एनिदड लाशिल। थन नर] ोनेतर याम) छाने कविस्‌ खामोटतव षेव शख नेवोत छक वौकः प्रखल भ्म जात षष्टिश्‌ नेनांडेन न); निष्टन सिसिश्) ामामवर रिक षटूषटिग खोमिन।

“जामान्‌, मो बोन्‌", वलिग्। नौविटकव्र] (षाठ टेमिन।

एभै९ जउयन खामफत गान षषम खामिष्डष्ट। कुर कृ ठकां९ शाकल रदे थम्काक़शा कोठरा नैन नाटकव्‌ विमौनं तर्ष) कं कनिम वाम कि (यन किनल। छांव्रनेत (मयान शरे गट नम्फु पिम) माट्त छेन सामि) शडिनि। (नोक क्‌ र्टेश्‌ गेल; माकर म्र श्वास णे एन कन (नोक्त छिव शधन कद्गिन। नोविकाण्व श्ट (म योज) (नोक) तीन

8२ मभैज्िक्‌।

माम्नाषेय। वष्टि (भेल। (नष्‌ छयन क्रुङ्‌ नोकोव. कनाम वद्िशा छेशरूत रषे शिया अनलण्िडि एशश-थव चात चेनत कुन ग्गं (कोट्नेत्र छेन (कान माद्द्डि लागिल। र्गरयव निषेव छेनैवर॒ धं. चष कत्रिग्रं कुन नखिष्डि नात्रिल; (८नोकोतर म््षा व्रक्-माय। एस्वि-माय। मारटमत पकद्व) शिकृवराहेवरं जामिर) शषि{ञ नोभिन। खम यब्रनोम छत्र उयन मव्रन-कोप्रु काम्राडे- वाब्र ऊक चेर ्ठेन। विनाल भूयनेखवटत (नोक उभ) कामछरेग श्र] खामर7फत॒ मवद कन ङ्के (मोका गृष्छ ङूनिग्र। (कलिल-- रिकं (यमन कत्रि भिरठ यकष ठदिनिणोवक भूय कत्िम्र। (छोटन। अमत्र] मकटन रथव व॒ ताछ गशेष्निम; द्वो कत्व) ऊटलव अटा ग्ड ङ्ठेड, किक ८. यन यथामङ्न गङ््ड करे ठव्शरन्‌ षटरंष्म्

--"---~ --+~---~----~ ---

युश्यतर वुटकव्र मद्रशा वमष्ेवरा मिलि। ध्नोकाव॒ ममदन (लोरोव्र नाष्ट क्ि (मोष, छनैः काट र्गो क्षम कत्य (मठे (नारू) एरुमतोन्रेया छोन कत्र) मिल: किष महे (नव भर ऊटल्लत ङ्डिवि बआ्ं गोट विगर (भेल; किद्धि शरूनवाग खनत चखेशत्र छाम) देर; लष नय्--श्षू डावर बद्र (नोकात्र शिषटटन कछ यि] वार्शिम्र कान खामाट्रम। काठ] ८मषएे। सान। जडेन) जाङाणं टडूलिः्ड नोतिकटफव भुवढे (तन नादेष्डकृटेयाषिनि; ८मषठिद्र छन ५०,००५ शठे अर्ण< शग ५२९ ममे

म्‌9ज्िक ५९ | ,

, शन्रपिन ऽभ्डे (रुक्ग्रादौ। नाना कऊाौश्र नाचौ गुटका दषि्डशिनि, क्डकश्नि गोत्र वंवाट्वरतर वाव] कत्‌] (भेल छात बहश मानतर-कन)ड नौननाफव ठम्‌

माःक्व)९कृष्टे। वन्न] पोत ममरस भिनांढे नर्वद (एय गाढरेनोत्र। ठे नोरा्ट्द चेनत ठुलत्र भूम ज्ेगरव्र्क

~ ^~ ~~ ^= ~~ ८--~ ~ ^= ~~ ~= ~= ~=

गरुय (फखिष्ड नोन ट्वक)द्लत सिर खोद्नोश मभुवत्‌ तृटकंत्‌ ेगद जानक @ङक्‌ ऊन्‌ख्नि (यन) कति ८प थि नाडठेनोम। (पफसि्ड (फरि्ड वोदधिव खक्रकाट्तर एड्क्िक गणशो र्टेग्‌] (भैन। (क)शथां€ (कोन गक नाठे ; एोत्ििश्िःकं निख्क्र, (कवल मोद मोड (गलिकान्‌ अश्ाद निमाषटद्‌

85 मोत कं]

गाचौव ककरण कोन्नांव्र खोक गैर्ववट्डत्र छेशब (एष्ेद्‌ खाट) भेक ष्टु) यात्‌ रिष्टे (गान्‌ (भैन न)। ब्रां 9, नमत नमग 18 विभ एलिन, किध खङ्रूमोटन वुङ्न जं)राल ससःखत्‌ शूव॒ कृष्ट्‌]कांष्ठि ख) मिष्ट मा नुष्ठव्र मश छ1ङ1ढ शरुनतुोग्न सनव भेत्‌ डोभिगु) छेन, खांमि€ छाटमत॒ नेत्‌ निमृ छेरिल)म पृ कटे) श्रोन नोन खटन। (पविना ; 9, "क तन कुयामोत॒ फक एन्‌